देख कबीरा रोया

जहॉं दु:ख शब्‍दों में उमड़ आया, जहॉं मन के भावों ने पाई काया....

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अब रोक जनम की चक्की रे !

Posted On: 1 Aug, 2015 Others में

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मदर इंडिया फिल्म के एक लोकप्रिय गीत की एक पंक्ति है – “अब रोक जनम की चक्की रे संसार चलने वाले”. यह उक्ति हम भारतीयों पर वाजिब ठहरती है. ताज़ा आंकड़ों के अनुसार सन 2022 तक इस देश की जनसँख्या दुनिया के अन्य सभी मुल्कों से अधिक हो जाएगी और इस मामले में चीन को तो हम बहुत पीछे छोड़ चुकेंगे. गोया औद्योगिक उत्पादन न सही पर बच्चों के उत्पादन में हम अग्रणी होंगे. परन्तु ये बच्चे भी भला कैसे बच्चे- मरियल, बीमार , कुपोषण के शिकार और इनमें अनेक लावारिस बच्चे फूटपाथों पर पलेंगें. जरा सोचिये दुनिया में हमसे ज्यादा गैर जिम्मेदार राष्ट्र कोई हो सकता है जो लोगों में आर्थिक खुशहाली लाने के बजाय जनसँख्या वृद्धि में लगा हुआ है. फूटी आँखों से भी दिख रहा है कि हर जगह भीड़ – ट्रेनों – बसों, में, मेट्रो में, राह, घाटों , गली गलियारे और सड़कों पर सिर्फ भीड़ ही भीड़, पर हमें रत्ती भर शर्म नहीं आती कि बस बच्चे पैदा करते जा रहे हैं और वो भी वहां जहाँ खाने-पहनने का भी ठीक से सरंजाम नहीं है. लोग गावों से शहरों कि और भाग रहे हैं जहां गन्दी बस्तियों में जानवरों से बदतर जीवन-यापन करने को बाध्य हैं. मूलभूत सुविधाओं का सर्वत्र अभाव है.बेरोज़गारी दिन पर दिन बढ़ रही है, परिणामस्वरूप अपराध भी बढ़ते जा रहे हैं क्योंकि वो कहा है न कि “खाली दिमाग शैतान का घर” पर जनाब हमारी यह बच्चे पैदा करने कि मशीन बदश्तूर चालू रहती है. आज जब कहीं भी हादशे होते हैं याने भगदड़ मचती है, सैलाब आते हैं, ट्रेन या बस दुर्घटना होती है या फिर आतंकी हमले होते हैं तो दो चार नहीं बल्कि सैंकड़ों जाने जाती है. जाहिर है हर जगह इत्ते सारे लोग होते हैं जो इन हदशों कि चपेट में आ कर मर जाते हैं फिर भी हम यह सोचने को विवश नहीं होते कि भाई इस जनसँख्या को काबू करना चाहिए वर्ना ये सब विनाश लीलाएं इसी प्रकार चलती रहेगी और एक दिन ऐसा आएगा जब शायद आदमी ही आदमी को खायेगा.

एक समय मैडम इंदिरा गांधी की लगायी इमरजेंसी के दौरान उसके बेटे ने जबरन नसबंदी का चक्र चलाया जिसके उलटे परिणाम निकले क्योंकि भ्रष्ट सरकारी लोगों ने दहशत फैला कर इनाम बटोरने के लिए जिस किसी की नसबंदी कर डाली जिस से बात और बिगड़ गयी और बाद में यह अभियान असफल हो गया. संजय गांधी ने भी शायद ऐसा नहीं सोचा था. पर आज इस तरह बढ़ती आबादी के चलते अराजकता बढ़ रही है मुझे लगता है कि कानूनन तौर पर एक या दो बच्चे से अधिक पैदा करने वालों पर रोक लगानी होगी अन्यथा इस बेलगाम जनसँख्या के भयावह परिणाम होने वाले हैं. देश के वर्तमान जी.डी.पी. को देखते हुए यह संभव ही नहीं है कि देश कि इकोनॉमी इस बढ़ती जनसँख्या का भार उठा पाये. देश के हर नागरिक की यह जिम्मेदारी बनती है कि वो एक या दो से अधिक बच्चे नहीं पैदा करे. तीसरे बच्चे का तो कानूनन गर्भपात करा देना चाहिए. जब आप दो को ही अच्छा जीवन देने में असमर्थ हैं तो तीसरे को इस गरीब देश के यातनागृह में लाना जुर्म नहीं है तो और क्या है.

- ओपीपारीक43oppareek43



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