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वहाबी बनाम सूफीवाद

Posted On: 22 Jul, 2015 Others,social issues,Junction Forum में

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जिन्होंने मेरे 6 ब्लॉग (वहाबी इस्लाम का खुनी सफर) पढ़ें होंगे उन्हें यह स्पष्ट हो जाना चाहिए की सऊदी अरब किस प्रकार कट्टर ‘सलाफी’ इस्लाम के प्रसार के लिए भारत सहित उप महाद्वीप के अन्य सभी देशों में खुल कर पैसे खर्च कर रहा है जो की नयी मस्जिदें और मदरसे खोलने में लगाये जाते हैं. पिछले महीने विकिलीक्स के खुलासो से ये बात पूरी तौर से साबित हो गयी है. भारत का मुस्लिम सम्प्रदाय आम तौर पर शांति और भाईचारे में यकीन करता है पर धीरे धीरे देश के इस सांप्रदायिक सौहार्द्र को नष्ट करने की साजिश रची जा रही है जिसमे पाकिस्तानी आई. इस. आई का प्रमुख रोल है.

कट्टरपंथी सलाफी (सुन्नी) अपने ही भाइयों याने शिया, अहमदिया, सूफी और अन्य इस्लामी पंथियों को काफ़िर मानते हैं. इनमें सूफी मत मान ने वालों की संख्या काफी है. गौरतलब है की सूफीमत इस्लाम की ही एक शाखा है जो उदारता और इंसानी भाईचारे में विश्वास करती है.यही कारन है किअनेक देशों में सूफीवाद मानने वाले अच्छी खासी तादाद में मौजूद हैं . एक समय भारत में भी अनेक सूफी संत हुए हैं जिनमें कुछ तो कृष्ण भक्ति से प्रभावित रहे हैं. इस देश में आज भी सूफियों के मज़ारों और दरगाहों पर सभी धर्मों के लोग इबादत मन्नत करते हैं. मिसाल के तौर पर अजमेर के ख्वाज़ा, गरीबी नवाज, आगरा के चिश्ती और निजामुद्दीन औलिया (दिल्ली) के दरगाह पर हिन्दू, मुस्लिम, सिख सभी धर्मावलम्बी अक़ीदत पेश करते हैं. औलिया के चेले अमीर खुशरो हिंदी खड़ी बोली के जनक रहे हैं तथा वे फ़ारसी, संस्कृत और हिंदी के विद्वान ही नहीं बल्कि उपनिषद् और वेदों आदि के अध्येता भी थे. लेकिन अब वहाबियों ने इन्हें काफ़िर करार दिया है. शियाओं कि भाँती इन पर भी जानलेवा हमले किये जा रहे है,. सोशल मीडिया में इनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रा है. पर ज़ाकिर नाइक नाम के सख्श ने वहाबी इस्लाम के समर्थन में मुहीम छेड़ राखी है. दूसरी और सूफी स्कॉलर ताहिरुल कादरी भी उनके भ्रामक प्रचार का जवाब देने कि कोशिश कर रहे है. परन्तु आई. एस. आई. एस. कि मानव विरोधी खुनी मुहीम ने कट्टरपंथियों को ताकतवर बना दिया है जो कि पूरी मानवता के लिए एक चुनौती है . कुल मिला कर यह बुराई के खिलाफ भलाई की जंग है.. सलाफी इस्लाम इंसानियत का दुश्मन है , इसलिए यह बुराई है जब कि सूफियत प्रेम और सहिष्णुता का फलसफा है जो कि मुहम्मद साहब के अच्छे आदर्शों और कुरान के अद्यात्मिक पक्ष पर चलना सीखा ता है. सऊदी अरब की इस साजिश को असफल करना जरूरी है. .

- ओपीपारीक43oppareek43



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