देख कबीरा रोया

जहॉं दु:ख शब्‍दों में उमड़ आया, जहॉं मन के भावों ने पाई काया....

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इन आतंकवादियों का क्या करें?

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कितने अफ़सोस की बात है – जब केजरीवालजी हमारी संसद में काबिज अपराधी सांसदों पर कटाक्ष करते हुए उन्हें गुंडे या बदमाश कहते हैं तो सारी संसद की भीड़ को आपत्ति होती है और जब ये लोग हाथा-पायी, मार-पीट, माईक तोड़, शीशा तोड़ , कागज़ फाड़ तथा मिर्ची स्प्रे आदि इत्यादि कारनामें करते हैं तो किसी पार्टी को कोई एतराज़ नहीं होता. ये सब चुल्लू भर पानी में डूबने जैसे वाक्यात हैं पर क्या करें साहब ये लोग कानून बनाते हैं तो इन्हें तो कानून तोड़ने का हक़ होना लाज़मी है.


जब संसद पर पाकिस्तानी आतंकवादियों का हमला हुआ तो हमारे कई सुरक्षा कर्मचारी उन की गोलियों की चपेट में आ कर शहीद हो गए थे. आप शायद यकीन करें या ना करें पर कुछ आम आदमियों को मैंने यह कहते सुना की वो बेचारे तो व्यर्थ ही मारे गए बल्कि मरना तो उनको (सांसदों) को चाहिए था.. इस बात से पता चलता है की आम आदमी इन सांसदों, मंत्रियों और अफसरों से कितनी नफरत करता है .दरअसल हमारे अनेक सांसद बहुत अच्छे और शरीफ हैं मगर वो कहावत है ना की एक मछली भी सारे तालाब को गन्दा कर सकती है; फिर हमारी संसद में तो 153 ऐसे लोग हैं जिन पर गम्भीर अपराधों (हत्या, डकैती, लूट, अपहरण, गैर-कानूनी कब्जे, अवैध खनन, पैसा लेकर प्रश्न, आय से अधिक संपत्ति, आदि इत्यादि) के मुकदमें और आरोप हैं. ऊपर से जब ऐसे लोगों के चुनाव में खड़े होने पर प्रतिबन्ध की बात आती है तो ये सारे एक हो जाते हैं. इसी प्रकार तरह-तरह की सहूलियतें, वेतन-भत्ता आदि भी अपने खातिर खुद ही पास कर लेते हैं. सांसद फंड का हिसाब नहीं देते. पार्टी को मिले देशी विदेशी चंदों व अन्य जानकारी को आर. टी. आई. के अधीन नहीं लाना चाहते. आखिर क्यों ? वो कहावत है चोर-चोर मौसेरे भाई.

मुझे ये बताइये की पाकितान की आई. एस. आई. आतंकवादियों को भेज कर संसद पर हमला बोले तो उनके सरगना (अफ़ज़ल गुरु ) को आप फांसी देते हैं परन्तु संसद में चिल्ली स्प्रे (chili spray ) फ़ैलाने वाले को छोड़ देते हैं इसका क्या मतलब है. आज किसी ने मिर्ची स्त्राव किया कल कोई कट्टा या पिस्तौल ले कर आएगा और गुस्से में आ कर हो सकता है की स्पीकर या किसी विरोधी को गोली से उड़ा दे. हाँ जनाब यह बिलकुल सम्भव है और इसे आप मेरी भविष्‍यवाणी मान सकते हैं क्यों कि एक न एक दिन ऐसा ही कुछ घटित होने वाला है और मैं तो सिर्फ सावधान कर रहा हूँ पर भला मेरी क्या औकात क्यों कि मैं एक आम आदमी हूँ जिसके लिए कह सकते हैं कि उसकी आवाज तो “नक्कारखाने में तूती कि आवाज भर है.

केजरीवालजी को कोसना तो सब से आसान है पर कोई उतना भी कर के दिखाए जीतना उनहोंने 49 दिनों में कर दिखाया. मीडिया और हम मध्यम वर्गीय लोगों के साथ एक बड़ी मुश्किल है के वे हर चीज में अपना सुविधापरस्त अक्स याने परंपरा जनित ढांचा देखने के आदी हो चुके हैं. धरना या मोहल्ला सभा आदी लीक से हटी बातें उनके पेट में पचती नहीं है क्योंकि वे इंडिया के बाशिंदे हैं और ये भूल बैठे हैं कि एक भारत है जिसमें अधिकांश जनता निवास करती है. अब भारत को भूरे साहेब (brown saahib ) और माई बाप अफसरों के चंगुल से बचाने की जुर्रत कोई करे तो यह हमारे इंटेलेक्चुअल वर्ग को समझ में नहीं आता. केजरीवालजी जैसे भी हैं, इन सड़े-गले राजनीतिज्ञों की तरह तो नहीं है जो मंत्री हो कर भी माफियाओं की जुबान में बात करते हैं. यकीन ना हो तो सलमान खुर्शीद का जुमला याद करिये जब उनहोंने कहा था की केजरीवाल फर्रुखाबाद आ तो जाए पर सही सलामत लौट नहीं पायेगा. ये देश के कानून मंत्री का बयान है और आज यही लोग (साथ में बी.जे.पी. भी )” आप पार्टी ” के सोमनाथ भारती पर उंगलियां उठा रहे हैं क्योंकि अपने गिरेबान में कौन झांकना चाहेगा.

बहरहाल हम एक बार फिर संसद के ड्रामे पर आते हैं. संसद हो या विधान सभाएं, सभी तरफ इन आतंकवादी प्रवृत्ति के लोगों का बोलबाला है तो ऐसे में क्या करें. चाहे मोदी आयें या कोई अन्य प्रधान मंत्री बने, उसे देशहित में अपनी पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर उठ कर सोचना होगा, तभी ये देश बच पायेगा अन्यथा बर्बादी निश्चित है. .

-ओपीपारीक43 oppareek43



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
February 21, 2014

आदरणीय पारीक जी सुंदर लेख इन्ही के कारन तो वो आतंकवादी भी फँसी से बचकर छूट रहे हैं ये देश के लिए ज्यादा खतरनाक हैं

sanjay kumar garg के द्वारा
February 21, 2014

माननीयों द्वारा अमानवीय कार्य! आदरणीय पारीक जी! सही बात लिखी है आपने!

jlsingh के द्वारा
February 18, 2014

आदरणीय पारीख साहब, आपने शायद अरविंद केजरीवाल का दिल्ली विधान सभा में अंतिम भाषण सुना होगा – उसने कहा था – “मैंने कल रात पूरा संविधान पढ़ा – इसमे कहीं यह नहीं लिखा हुआ है कि अगर किसी बिधायक या सांसद की बात न सुनी जाय तो उसे अध्यक्ष का माइक तोड़ देना चाहिए या कुर्सियां तोड़ देनी चाहिए”. इस गम्भीर और संक्षिप्त भसहन के बीच भी विपक्षी हो हंगामा करते रहे ..वो सब संविधान सम्मत था. … केजरीवाल ने एक मशाल जलाई है … अब देखना है कि हम सब उस मशाल को कितना आगे ले जाते हैं… सादर!

    O P Pareek के द्वारा
    February 19, 2014

    सिंह साहब, सबसे बड़े आश्चर्य कि बात है कि जो काम पिछले 65 साल में नहीं होपाये वे सब 49 दिनों में पूरा करने की आशा करना और चुन-चुन कर केजरीवाल पर कटाक्ष करना क्या उचित होगा. देखिये बेईमानों की महफ़िल में एक ईमानदार आदमी का जो हश्र होता है आखिरकार केजरीवालजी के साथ वही तो हुआ. जन लोकपाल पास करने का वक़्त आया तो बी.जे.पी. और कांग्रेस दोनों मिल गए वर्ना ये (BJP ) वाले केजरीवालजी को पानी पी-पी कर कोस रहे थे की उनहोंने “भ्रष्ट कांग्रेस” पार्टी का समर्थन लिया. केजरीवाल जी को हटाने के लिए कांग्रेस का समर्थन लेने में बी.जे.पी. को ज़रा भी शर्मिंदगी नहीं महसूस हुई. कैसी विडम्बना है ये .


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