देख कबीरा रोया

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ये बिगड़ैल काले कोट वाले गुंडे और जनतंत्र

Posted On: 18 Feb, 2016 में

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ज़ाहिर है काले कोट वालों से मेरा तात्पर्य उन वकीलों से है जो वकालत के गरिमामय प्रोफेशन के नाम पर काला धब्बा है. यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि अधिकांश वकील अपने पेशे कि कद्र करते हुए बतौर अदालत के आफिसर की हैसीयत से संविधान और कोर्ट को समुचित सम्मान भी देते हैं पर निचली अदालतों में आज भी गुंडा-बदमाश श्रेणी के वकीलों का बोलबाला हो रहा है जो देश के लिए चिंताजनक विषय है. देश की राजधानी दिल्ली में निस तरह 15 और 18 फरवरी ,2015 के दिन जो कुछ देखने को मिला वो इसका जीता जागता प्रमाण है. येन केन प्रकारेण LLB की डिग्री ले कर आये और वकील बन गए फिर उलटे सीधे धंधों और तौर तरीके से अदालत परिसर में जम गए परन्तु वकालत की आचारसंहिता को ताक पर रखने में कभी कोई शर्म नहीं आई. इसीलिए मैंने इस ब्लॉग में इन्हें बिगड़ैल काले कोटवालों की संज्ञा दी है.


सन्दर्भ है JNU मामले में अभियुक्तों की पेशी के दौरान जो गुंडागर्दी इन वकीलों ने दिखाई उस से देश की इज़्ज़त को ठेस पहुंची. ये तथाकथित ‘देशद्रोहियों’ की पिटाई करने का दम भरते हैं पर इस महान देश के जनतंत्र और संविधान की धज़ियाँ उड़ाने के लिए इन्हें भी तो विधि-सम्मत सजा मिलनी चाहिए. JNU विद्यार्थी यूनियन के अध्यक्ष पर तो अभी सिर्फ अभियोग लगा है पर सिद्ध नहीं हुआ है पर इन्होंने तो खुले आम गुंडागर्दी की है जिसके वीडियो सबूत भी हैं तो सबसे पहले इन्हें सजा मिलनी चाहिए. बेशक इन बिगड़ैल वकीलों ने लोकतंत्र पर प्रहार किया है जो क्षम्य नहीं है.

मान लेते हैं की नारे लगाने वालों ने देशद्रोह किया पर उन्हें सजा देने के लिए एक पूरी कानूनी प्रक्रिया और दंड विधान है. फिर कोई भी कानून अपने हाथ में ले कर उन अभियुक्तों पर हमला करता है तो वो कहीं ज्यादा बड़ा अपराधी है. मैं JNU में हुयी देश विरोधी नारेबाजी को उचित नहीं ठहरा रहा हूँ मगर सिर्फ यही कहना चाहता हूँ की अभियुक्तों के साथ क़ानून के अंतर्गत व्यवहार हो. किसी को ये हक़ नहीं बनता की वो सरे आम अदालत परिसर में उनके साथ मार पिटाई करे. यही नहीं इन्हों ने तो पत्रकार बिरादरी को भी नहीं बक्शा . ये सारी वारदातें कैमरे के सामने हुयी जो कि पुख्ता सबूत हैं. वीडियो में उन गुंडे वकीलों के चेहरे भी साफ़ दिखाई दे रहे हैँ फिर भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होना साफ़ तौर पर दुर्भाग्यपूर्ण है. पुलिस के सामने ये हमले हुए और पुलिस मौन हो कर देखती रही. इस से साफ़ हो जाता है कि यह पुलिस व प्रशासन की मिलीभगत थी और इस बात की जांच होनी चाहिए..


इस देश की बार कौंशील भी नाकारा है जो ऐसे गलत लोगों को प्रेक्टिस करने का लायसेंस देती है. बार काउन्सिल की कार्यप्रणाली की जांच कर उसमें सुधर होना चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना होने पाये.


-ओपीपारीक43oppareek43



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
February 19, 2016

बहुत सटीक लेख है पारीक जी । पूर्णतः तथ्यपरक और नग्न सत्य की ओर इशारा करने वाला । हमारे देश में येन-केन-प्रकारेण कानून की उपाधि प्राप्त करके नाम की वकालत और वास्तव में उसकी ओट में गुंडागर्दी करने वाले काले कोट वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है । वकील का चोगा पहने ऐसे अनेक लोग अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए सभी नैतिकताओं और पेशेगत मूल्यों को ताक पर रखकर अपने यजमानों के लिए न केवल अवैधानिक कार्य करते हैं बल्कि खुलेआम गुंडई पर भी उतर आते हैं जैसा कि अभी-अभी पटियाला कोर्ट में देखा गया । जब न्याय के मंदिर में न्याय के रक्षक ही न्याय की धज्जियां उड़ाने लगेंगे और पुलिस तथा न्याय के उच्च आसन पर बैठे न्यायाधीश महोदय केवल तमाशा देखेंगे तो कहाँ जाएगा न्याय और कहाँ जाएंगे अन्याय से पीड़ित ? इस मामले में विक्रम चौहान नामक दोषी वकील का तो शाहदरा बार एसोसिएशन ने सम्मान भी किया है जो इस बात का संकेत है कि इस व्यवसाय में लगे लोगों और संस्थानों की मानसिकता हमारी कल्पनाओं से भी अधिक पतित हो चुकी है । ऐसे में क्या अंतर रह जाता है भारत और पाकिस्तान की न्याय-व्यवस्था में ? बात-बात पर अपनी अवमानना के लिए लोगों को सलाखों के पीछे भेजने में ढील न करने वाले न्यायालय को क्या इस मामले में अपनी अवमानना दिखाई नहीं दे रही ? क्या वह स्वयं इस मामले का संज्ञान लेकर स्वतः-स्फूर्त कार्रवाई नहीं कर सकता ताकि आमजन का देश की न्याय-व्यवस्था में बचा-खुचा विश्वास कायम रह सके ?

    oppareek43 के द्वारा
    February 19, 2016

    देश की न्याय व्यवस्था कि क्या बात करें, माथुर साहब, आप कभी (एक जागरूक नागरिक के नाते ) तिहाड़ जेल का मुआयना करेंगें तो पाएंगे कि सैंकड़ो तथाकथित अंडरट्रायल कैदी जो अत्यंत मामूली अपराधों के कारन पुलिस ने जेल भेज दिए वहां नारकीय हालत में जेल काट रहे हैं क्योंकि उनके पास बेल ( bail ) करने के लिए कोई जुगाड़ नहीं है. देशद्रोह एक बहुत संगीन अपराध है और यह चार्ज एक छत्र नेता पर लगाया गया है. बेशक गंभीर बात है पर उसे खुद को डिफेंड करने का मौका मिलने के बाद ही तो आप उसे देशद्रोही मानेगें. दुर्भाग्यवश बहुत से लोगों ने उसे पूरी छानबीन के पहले ही अपराधी मान लिया है. जज के पास जाते हुए उस कि पिटाई करते हैं . पुलिस कुछ नहीं करती. जज महोदय कुछ नहीं कहते और 14 दिन कि रिमांड पर जेल भेज देते है. ये १४दिन भी सजा के बराबर हैं. बताइये ये कैसा न्याय है, माथुर साहब.

Shobha के द्वारा
February 19, 2016

श्री पारिख जी कन्हैया ने जो काम किया है उसके अंडर में देश विरोध नारे लगे थे देश उसका भी है | दिल्ली की जनता में बहुत रोष है | उसी की अभिव्यक्ति थी सब गुंडे नहीं हैं| भावुक लोग भी हैं यदि आम जनता की वहाँ तक पहुंच होती वही होता जो होना चाहिए था ऐसे लोगों का साथ दिया जो पाकिस्तान से ट्रेनिंग ले कर आया था मेरी वहाँ तक पहुंच होती यही करती |एक जन साधारण की भर्त्सना भी होती है | बहुत न के बराबर फ़ीस पर पढ़ते हैं दिल्ली का पोश एरिया हैं ११ रूपये महीना के कमरे में रहते हैं पैसा जनता के टैक्स से आता है देश का अपमान नारे लगाने वालों ने किया है पुरे देश में इनके खिलाफ आवाज उठा कर देश की इज्जत बढाई है लोग शर्मिंदगी महसूस क्र रहे हैं दिल्ली के दिल में यह हुआ

    oppareek43 के द्वारा
    February 19, 2016

    शोभाजी, विचारों का आदर करना हर नागरिक का कर्तव्य है चाहे अन्य के विचार से सहमति ना भी हो, अतएव मैं आपके विचारों का सम्मान करते हुए सिर्फ यह कहना चाहता हूँ कि वकीलों कि गुंडागर्दी को आपने काम कर के देखा है. मुझे कचहरियों का अनुभव है इसलिए मैं आपको बताना चाहूंगा कि निचली अदालतों में खासी संख्या में अपराधी और गुंडे बदमाश वकालत कर रहे हैं और वकील का काल चोंगा उनका मुखौटा है..पटियाला हाउस कोर्ट में उन वकीलों ने व्यापक हंगामा और मार पीट कि jo उनकी वकालत के पेशे के लिहाज क्षम्य नहीं है सोचिये डाक्टर ही गलत दवा दे कर मरीज़ को मारे तो ये कहाँ तक सही है और फिर ऐसी गुंडागर्दी न्यायालयों में हो (और वो भी वकीलों द्वारा) तो फिर संविधान का क्या मतलब. मैंने बार बार कहा है की देशविरोधी नारे लगाने वाले गलत है और दण्डित होने चाहिए पर जब तक जनतंत्र और संविधान इस देश में है ऐसा दंड देने का कानून सम्मत कायदा है और हर नागरिक को उसका परिपालन करना चाहिए वरना तो जंगल राज होगा और उसकी कोई सीमा नहीं..


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