देख कबीरा रोया

जहॉं दु:ख शब्‍दों में उमड़ आया, जहॉं मन के भावों ने पाई काया....

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जलता गुजरात और पटेल बिरादरी

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रिजर्वेसन की आग में आज गुजरात जल रहा है. कल राजस्थान जलेगा और इसके बाद कौनसे और राज्य जलेंगें कहना मुश्किल है. आज की पीढ़ी को तो पता भी नहीं है कि मंडल कमि कि सिफारिशों को जब तत्कालीन प्रधानमंत्री विस्वनाथ प्रताप सिंह ने लागू की तो उस समय देश की राजधानी दिल्ली में भी विरोध और हिंसा का दौर चला था. एक छात्र ने भरी भीड़ के सामने आत्मदाह कर मरने की भी चेष्टा की थी. उसके पश्चात के दशकों में आरक्षण को ले कर बार बार अनेक स्थानों पर आंदोलन हुए.राजस्थान में जाट और गूजर आरक्षण की मांग कर रहे हैं. वे अपनी तुलना उन मीणों से करते हैं जो वास्तव में एक शिड्यूल्ड ट्राइब रहा है और इस आधार पर उसे आरक्षण मिला था. जहां तक जाटों का प्रश्न है वे एक ऐसी मेहनतकश और धाकड़ बिरादरी के सदस्य हैं जो आज राजस्थान में अपना एक विशिष्ट स्थान रखती है परन्तु उन्हें भी आरक्षण चाहिए. उनका राज्य सरकार में अच्छा भला प्रतिनिधित्व भी है फिर भी सरकारी नौकरी के प्रलोभन में आरक्षण की चाह रखते हैं. यह कैसा पागलपन है.


जहां तक गुजरात के पटेलों का सवाल है उन्होंने सिर्फ गुजरात में ही नहीं बल्कि अमेरिका तक में अपना वर्चस्व बनाया है. अमेरिका में वे मोटेल व अन्य व्यवसायों की बदौलत अच्छे खासे समृद्ध लोग हैं.कुल मिला कर यह तथाकथित पाटीदार अनामत आंदोलन सिरे से अनुचित कहा जाएगा बल्कि इसे मैं देश विरोधी कार्रवाई कहूँगा तथा सरकार से अपील करूँगा कि बातचीत कर के समझा बुझा के इस आंदोलन को ख़त्म करे. अगर सख्ती कि जरूरत हो तो देश हित में सख्ती बरतना भी जरूरी होगा. एक बाईस साल के हार्दिक पटेल ने देश को जो नुक्सान पहुँचाया है उसके लिए उसे जेल कि सलाखों के पीछे होना चाहिए ना कि हिंसक आंदोलन भड़काने को खुला छोड़ना चाहिए.



दरअसल आरक्षण एक अच्छे उद्देश्य के खातिर संविधान में रखा गया था परन्तु इन परिश्थितियों को देखते हुए जाती और वर्ग के आधार पर आरक्षण देश को तोड़ने का काम कर रहा है ना कि जोड़ने का. अगर आरक्षण कि नीति को जारी रखना ही है तो यह आर्थिक विपन्नता के आधार पर होना चाहिए. निम्न आय वाला कोई भी हो, चाहे ब्राह्मण, बनिया, पटेल, गुजर, जाट, आदिवासी या अन्य वर्ग का उसे गरीबी के आधार पर आरक्षण देना चाहिए, ना के जाती के आधार पर. इसके लिए आय सीमा निर्धारित की जा सकती है. आज OBC में भी एक समृद्ध वर्ग (creamy layer है जो आरक्षण के आधार पर सुविधाये झपट लेता है और उसी के गरीब भाई बंधू टापते रह जाते हैं. यह कैसा आरक्षण हुआ. आरक्षण ने पहले ही देश का सत्यानाश किया हुआ है. अब और नहीं. इसे बंद करना चाहिए.

- ओपीपारीक43 oppareek43



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