देख कबीरा रोया

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पैसे पेड़ों पर नहीं लगते पर चोरी पर तो लगाम कसिये

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आदरणीय डा. मनमोहन सिंघजी,
कल देश के नाम जो सन्देश आपने टी.वी. चेनलों के माध्यम से दिया उसे देख कर लगा की आप बोलते भी हैं वरना हमने तो अब तक यही देखा की आप तो जैसे सांप सूंघ के बैठे हुए हों. पहली बार लगा कि कोई प्रधान मंत्री बोल रहा है . बहरहाल आपने ठीक फरमाया कि सब्सिडी ख़त्म नहीं करेंगें तो वित्तीय घटा कहाँ से पूरा करेंगें. बात सही है और समझ में भी आती है. आपने एक आंकड़ा भी दिया कि अगर सब्सिडी का बोझ कम नहीं करेंगें तो अगले साल तक यह घटा कोई 2 लाख करोड़ तक पहुँच जाएगा. अब इस तर्क के मद्दे नज़र आपको बताना चाहूँगा कि जिस घाटे कि बात आप कर रहे हैं वो तो सत्ता में बैठे भाई बंधू आपके इस दो लाख करोड़ से कई गुना ज्यादा पैसा पहले ही “जीम” चुके हैं , परन्तु आपने अपने इस भाषण में उस लूट का कोई जिक्र अभी तक नहीं किया और यह बात देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि आप जनता पर तो बोझ डाल रहे हैं पर चोरों से डकैती के पैसे कि भरपाई करने को नहीं कह रहे. कुछ तो शर्म करिए प्रधान मंत्रीजी. सरकार क्या बच गयी और आपकी चोकड़ी ने तालियाँ पीटली पर इसको खामियाजा भी २०१४ में भुगतना है जिसे आप भूल गए. जरा गौर कीजिये चोरी के आंकड़ों पर जो आज जग जाहिर हो चुके हैं :-
2 – G स्केम Rs 176000 करोड़ रुपये
कोलगेट घोटाला 186000 करोड़ रुपये
कामनवेल्थ गेम स्केम 70000 करोड़ रुपये
आदर्श सोसायटी 250 करोड़ रुपये
NRHM (उत्तर प्रदेश) 12000 करोड़ रुपये(अनुमानित)
एयर इंडिया 70000 करोड़ रुपये (अनुमानित)

ये कुछ चुनिन्दा घोटाले हैं जब की ऐसे अनेक घोटाले और भी हैं जो राज्य और केंद्र के स्तर पर हुए हैं और हो रहे हैं. इस में NHAI और सड़क परिवहन मंत्रालय के वो घोटाले शामिल नहीं है जो दी. एम् के. के मंत्री “बालू” ने किये क्योंकि उन की जांच आज तक नहीं हुयी. हालांकि सड़क निर्माण और ‘टोल’ ठेकों से सम्बंधित ये घोटाले लाखों करोड़ रुपये के हो सकते हैं अगर समुचित जांच करायी जाए.

प्रधान मंत्रीजी आप २ लाख करोड़ रुपये के तथाकथित वित्तीय घाटे के नाम पर देश की गरीब जनता पर बोझ तो डाल रहें है पर इस बात से आँखें बंद कर रहे हैं की उपरोक्त फेहरिस्त का टोटल ही आपके उस घाटे का तीन गुना बैठेगा. आप डी. एम्. के. और अपनी पार्टी के चोरों से यह लूट का माल क्यों नहीं वसूलते. उलटे जनता पर बोझ दाल रहे है. प्रफुल्ल पटेल ने जिस तरह से एयर इंडिया में लूट मचाई दुनिया के इतिहास में एक मिसाल मानी जायेगी क्योंकि जहां एक और कर्मचारियों और पायलटों को वेतन नहीं दिया गया वहीँ दो-दो सौ विमानों के आर्डर इस घाटे वाली सरकारी कंपनी ने मंत्री महोदय की सहमती से दिए और आज तक कोई जांच नहीं. विमान खरीद में प्रफुल्ल पटेल ने कितना कमिसन खाया होगा यह कहना मुश्किल है. पर जो सरकारी एयर लाईन घाटे में चल रही है उसने दुनिया का सबसे महंगा वायु यान “ड्रीमलाईनर” ख़रीदा है. सोच सकते है की विमान खरीद में कमिसन का धंदा मंत्रियों के लिए कितने फायदे का सौदा रहा होगा.

चलिए, मान लिया की पैसे पेड़ पर नहीं लगते परन्तु ये जो लूट के पैसे नेताओं-मंत्रियों की जेब में गए वो कहाँ पर लगते हैं. बताइए प्रधान मंत्रीजी जरा बताइये तो.

-ओपीपारीक43oppareek43




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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
September 25, 2012

चलिए, मान लिया की पैसे पेड़ पर नहीं लगते परन्तु ये जो लूट के पैसे नेताओं-मंत्रियों की जेब में गए वो कहाँ पर लगते हैं. बताइए प्रधान मंत्रीजी जरा बताइये तो. ये शब्द तो हम बचपन से सुनते आ रहे हैं ! हर वृद्ध व्यक्ति अपने बच्चों से यही कहता है ! हमें ये भी तो जानने का हक़ होना चाहिए की जो पैसे हम सरकार को देते हैं उनका क्या होता है ! प्रधानमंत्री को ये भी बताना चाहिए था

nishamittal के द्वारा
September 23, 2012

जितना बोलने की अनुमति थी उतना ही बोल सकते हैं न

    jlsingh के द्वारा
    October 2, 2012

    बिलकुल सही कहा निशा महोदया ने…. जो आदमी अपनी पगड़ी का रंग के बारे में भी पूछता है वह भला अनुमति के बगैर क्या बोल सकता है. मानना पड़ेगा चाभी भरने वाली को …


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